हिमाचल के सुनील की लाचारी : कोमा में पत्नी, गोद में दुधमुंहा बच्चा-खाते में सिर्फ 256 रुपए

राइट न्यूज हिमाचल

हिमाचल प्रदेश के ऊना जिला स्थित चिंतपूर्णी विधानसभा क्षेत्र के गांव चक्कसराय में रहने वाले सुनील कुमार और उनका परिवार पिछले दो वर्षों से कठिन हालातों से गुजर रहा है। दुख के पहाड़ इस परिवार पर गिरे हैं जिसके कारण इनकी खुशहाली अब दुःख और दर्द में बदल चुकी है।

परिवार के मुखिया सुनील कुमार की स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि उनके पास अब अपने परिवार के इलाज और रोज़मर्रा के खर्चों के लिए पैसे तक नहीं हैं।परिवार के खाते में महज 256 रुपये हैं, जबकि परिवार की ज़रूरतें और इलाज के खर्चें लगातार बढ़ रहे हैं। सुनील कुमार की पत्नी रेणू बाला, 2022 में अचानक एक गंभीर बीमारी का शिकार हो गईं।

सांस लेने में दिक्कत होने के कारण उन्हें पहले ऊना क्षेत्रीय अस्पताल और फिर PGI चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया।फेफड़ों की बीमारी के चलते कोमा में गई पत्नीजांच में पता चला कि रेणु के फेफड़े फेल हो चुके हैं, जिसके बाद रेणू को कोमा में भेज दिया गया। वह इस दौरान 4 महीने की गर्भवती थीं और कोमा में रहते हुए 9 महीने बाद पीजीआई में ऑपरेशन के द्वारा एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया।

हालांकि, वह अपनी मां की देखभाल और प्यार से वंचित रह गए, क्योंकि उनकी मां कोमा में थीं और जीवन और मृत्यु के बीच झूल रही थीं।रेणू की हालत गंभीर होने के कारण सुनील कुमार को अपनी बेटी को उसकी नानी के पास भेजने पर मजबूर होना पड़ा। सुनील की बड़ी बेटी, जो अपनी मां से बहुत प्यार करती थी अब मानसिक तनाव से जूझ रही है।

रेणू की बीमारी का असर न केवल घर के माहौल पर पड़ा, बल्कि उसकी नन्ही बेटी के मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव डाला है। सुनील अब अपनी पत्नी के साथ-साथ अपनी बेटी का इलाज भी PGI में करा रहे हैं, ताकि वह जल्दी से ठीक हो सके।हालात और भी बदतर हो गए हैं, क्योंकि सुनील कुमार की आमदनी का कोई स्रोत नहीं बचा। वह कभी चंडीगढ़ में एक निजी लैब में काम करते थे, लेकिन अब उनकी नौकरी छूट चुकी है।

उनके ऊपर परिवार की हर सदस्य की जिम्मेदारी है। पत्नी की बीमारी, बेटी के मानसिक उपचार और एक नवजात बेटे की देखभाल के बीच, वह खुद को टूटते हुए महसूस कर रहे हैं। उनकी मां को भी दिल और श्वास संबंधी गंभीर समस्याएं हैं, और उनका इलाज भी जरूरी है।पिछले दो वर्षों में परिवार ने हर संभव कोशिश की, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण इलाज ठीक से नहीं हो पा रहा। हर 15 दिन में PGI में इलाज के लिए लगभग 12,000 रुपये का खर्च आता है, जिसमें एम्बुलेंस का खर्च और दवाइयां शामिल हैं।

इन खर्चों को उठाने के लिए सुनील कुमार के पास कोई साधन नहीं बचा है। उनका कहना है कि वह कर्ज में डूब चुके हैं और किसी भी तरह से अपने परिवार को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।इस परिस्थिति को देखते हुए, चिंतपूर्णी विधानसभा क्षेत्र के विधायक सुदर्शन बबलू ने इस परिवार की मदद के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय में फाइल भेज दी है। विधायक ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही इस परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी ताकि उनकी ज़िन्दगी में सुधार आ सके।

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