राईट न्यूज हिमाचल : करोना संकट के बीच डीजल के बढ़ते भाव से सिर्फ उद्यमी ही नहीं अब ट्रांसपोर्टर भी परेशान होने लगे हैं। इनका कहना है कि कच्चे तेल के दाम मे भारी गिरावट के बावजूद डीजल व पैट्रोल पर ऐक्साईस डयूटी बढ़ने से रोजाना दाम में हो रहे इजाफे से कारोबार पर विपरीत असर पड़ रहा है। आलम यह है करोना संकट मे भाड़ा बढ़ाएं तो भी मुश्किल और ना बढ़ाएं तो भी मुश्किल। ऐसे में क्या करें कुछ समझ में नहीं आ रहा है। ट्रांसपोर्टरों द्वारा सरकार से अपील की जा रही कि डीजल पर ऐक्साईस दर को घटा कर उन्हें राहत देने का काम किया जाए।
हिमाचल एक बड़ा औद्योगिक हब है। यहां अंबुजा, अल्ट्राटेक, ए.सी.सी व सी.सी.आई जैसी बड़ी सिमेंट कंपनियों के साथ-साथ इस्पात और फार्माँ की भी कई बड़ी कंपनियां हैं। इन उद्योगों में तैयार माल की ढुलाई रोजाना 20 हजार गाड़ियां करती हैं, जो देश के कोने-कोने में माल को ले जाने और लाने का काम करती हैं। इस काम में डीजल के बढ़ते रेट ने परेशानी खड़ी कर दी है।
क्या कहना है ट्रांसपोर्टरों का राईट न्यूज से बात करते हुए कुछ ट्रांसपोर्टस ने कहा 17 दिन में 7.13 रु डीजल का रेट बढ़ा है। बढ़ते रेट से दिनों दिन समस्या गहराती जा रही है। इस पर जल्द अंकुश नहीं लगा तो हमारा कारोबार बुरी तरह से प्रभावित होगा। रोजाना दाम बढ़ रहे हैं। ऐसी स्थिति में ईंधन पर खर्च का अनुमान लगाना भी मुश्किल होता जा रहा है।
ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि किराए के तौर पर मिलने वाली ज्यादातर रकम ईंधन पर खर्च हो रही है। यही हाल रहा तो गाड़ियों को खड़ी करने की नौबत आ सकती है।ट्रांसपोर्टर अनुज अग्रवाल व हरदीप सिंह विरदी का कहना है कि लाभ की मार्जिन तो पहले ही काफी कम हो चुकी थी अब तो लागत निकालना भी मुश्किल होता जा रहा है। ट्रक यूनियन के पास माल भाड़ा बढ़ाने के अलावा ओर कोई चारा नही बचा।

