राइट न्यूज हिमाचल
हिमाचल में इस साल भी मानसून भारी तबाही मचा रहा है. प्रदेश में 20 जून को हुई मानसून की एंट्री के बाद से अब तक भारी बारिश ने मंडी जिले के तहत सराज, थुनाग, जंजैहली व बगस्याड़ आदि क्षेत्रों में सबसे ज्यादा तबाही मचाई है. प्रदेश में मानसून के प्रवेश के 20 दिनों में सैकड़ों घर मिट्टी के ढेर बन गए हैं. कई लोगों की जान जा चुकी हैं. सैंकड़ों पशुओं की मौत हुई है. भारी बारिश से नालों और खड्डों में आई बाढ़ कई लोगों को अपने साथ बहाकर ले गई है.
जिनका अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है.वहीं, मौसम विभाग ने आज प्रदेश के मैदानी और मध्यम ऊंचाई के अधिकतर क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है. इस दौरान ऊना, हमीरपुर, कांगड़ा, मंडी और सिरमौर जिले में कुछेक स्थानों पर भारी बारिश का येलो अलर्ट भी जारी किया गया है. यानी इस दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में 5 से 15 सेंटीमीटर और मैदानी क्षेत्रों में 6 से 12 सेंटीमीटर बारिश हो सकती है. प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं.हिमाचल प्रदेश में मानसून की एंट्री के बाद से अब तक 85 लोगों की मौत हो चुकी है.
इसमें बिलासपुर जिले में 7 लोगों की जान गई है. इसी तरह से हमीरपुर में 6, कांगड़ा में 13, किन्नौर में 3, कुल्लू में 6, लाहौल स्पीति में 2, मंडी में 20, शिमला में 5, सिरमौर में 6, सोलन में 6 और ऊना जिले में 6 लोगों की मौत हुई है. वहीं, मानसून सीजन में अब 34 लोग लापता हुए हैं. इसके अलावा 129 लोग जख्मी हुए हैं. वहीं, अब तक 881 पशुओं की मौत हो चुकी है. इस दौरान प्रदेश में कुल 431 मकान मिट्टी के ढेर बन गए हैं. इसमें 404 पक्के घर और 27 कच्चे घर पूरी तरह से तबाह हुए हैं. इसी तरह से 751 पक्के घरों और 171 कच्चे घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है. इसी तरह से प्रदेश में अब तक 223 दुकानें क्षतिग्रस्त हुई हैं.
वहीं, 877 गौशालाएं ध्वस्त हो चुकी हैं.हिमाचल प्रदेश में मानसून सीजन में अब तक बादल फटने की 22 घटनाएं हो चुकी हैं. इसी तरह से अब तक 31 फ्लैश फ्लड आए हैं और 17 लैंडस्लाइड की घटनाएं घटित हो चुकी हैं. जिस कारण हिमाचल को 20 दिनों में 739.12 करोड़ का नुकसान पहुंचा है. जिसमें जल शक्ति विभाग को सबसे अधिक 402.91 करोड़ का नुकसान झेलना पड़ा है. इस दौरान बाढ़ के साथ आए भारी मलबे और पत्थरों के कारण कई पेयजल योजनाएं पूरी तरह प्रभावित हुई है. वहीं, बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं से बहुत सी पेयजल लाइनें टूट गई हैं.
प्रदेश में अभी तक भी 755 पेयजल योजनाएं बाधित हैं. इसी तरह से भूस्खलन और डंगे गिरने और सड़कें टूटने से लोक निर्माण विभाग को भी 318.90 करोड़ का नुकसान झेलना पड़ा है. प्रदेश में अभी तक भी 174 सड़कें अवरुद्ध हैं.

