राईट न्यूज / शिमला
प्रदेश प्रशासनिक सेवा(एचएएस) की परीक्षा में तृतीय स्थान पर रहीं अर्शिया शर्मा ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता को दिया है। मौजूदा समय में आबकारी एवं कराधान विभाग में सहायक आयुक्त पद पर कार्यरत होते हुए अर्शिया शर्मा का चयन एचएएस के लिए हुआ है। अर्शिया ने बताया कि एचएएस की परीक्षाओं की तैयारियों में पिता का विशेष योगदान रहा है। पिता सतीश शर्मा भी आबकारी एवं कराधान विभाग में संयुक्त आयुक्त पद पर कार्यरत हैं। माता मीनू शर्मा गृहिणी हैं। भाई रौनन पंडित दसवीं कक्षा में पढ़ाई रहा है। मूल रूप अर्शिया शर्मा चिंतपूर्णी के नजदीक दलवाड़ी गांव की निवासी हैं। राजधानी के खलीनी क्षेत्र के बीयरखाना में परिजनों के साथ रहती हैं। दो वर्ष पूर्व अर्शिया शर्मा का चयन ईटीओ में हुआ था। दसवीं की पढ़ाई उन्होंने ताराहाल स्कूल से करने के बाद बीटेक की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने माता-पिता को आदर्श बताते हुए सफलता का श्रेय अध्यापकों और दोस्तों को भी दिया।

शिखा ने बिना कोचिंग पास की एचएएस परीक्षा
वहीं, भटियात क्षेत्र के मंगनूह गांव की शिखा समितिया ने बिना कोचिंग हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा परीक्षा उत्तीर्ण कर प्रदेश में चौथा स्थान हासिल किया है। शिखा की कामयाबी के जिला में खुशी की लहर दौड़ गई है। उन्हें बधाई देने के लिए लोग घर पहुंच रहे हैं। शिखा ने यह कामयाबी बिना किसी कोचिंग के हासिल की है। बेटी की इस उपलब्धि के बाद पिता लिन्जो राम बेहद खुश हैं। माता गुड्डी देवी भी फूले ही नहीं समा रही हैं।
शिखा सेवानिवृत्त सेना अधिकारी लिन्जो राम व स्वर्गीय माता गुड्डी देवी की सात बेटियों में से सबसे छोटी हैं। कई बार असफल होने के बावजूद शिखा ने हिम्मत नहीं हारी और प्रयासरत रहीं। इससे पहले भी वह तीन बार एचएएस, दो बार अलाइड की परीक्षा में असफल हो चुकी थीं। लेकिन हार न मानते हुए कठिन परिश्रम से आज वह इस मुकाम पर पहुंची हैं इसका श्रेय वह अपने माता-पिता गुरुजनों व परिवार के सदस्यों को देती हैं।

शिखा का कहना है कि 66 वर्षीय पिता मेरे लिए सबसे बड़े प्रेरणा स्रोत हैं, जिन्होंने एचएएस के इस कठिन सफर में मेरा साथ दिया। ऐसे अवसर प्रदान किए कि आज मैं इस मुकाम पर पहुंची हूं। मैं हर एक पिता से गुजारिश करती हूं कि अपने बच्चों पर भरोसा रखें और सवर रखें, मेहनत का फल जरूर मिलता है।

