राइट न्यूज हिमाचल
हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के बीच मंडी से कुल्लू के बीच में चंडीगढ़ मनाली एनएच कई बार बंद हुआ है. इस दौरान कई गाड़ियों यहां घंटों फंसी रही. इसी दौरान एक एंबुलेंस यहां जाम में फंस गई और समय पर अस्पताल न पहुंच पाने के कारण मरीज की मौत हो गई. इसी बीच परिजनों ने बंद एनएच को न खुलवाने और मरीज को अस्पताल में समय पर उपचार न मिलने के कारण मंडी जिला के एक अधिकारी को उसकी मां की मौत का जिम्मेदार ठहराया है.युवक का आरोप है कि अधिकारी की लापरवाही के चलते वो चंडीगढ़-मनाली एनएच पर डेढ घंटे फंसा रहा. बाद में विधायक की सिफारिश लगाने पर मां को मंडी पहुंचाया गया, लेकिन वहां उनकी मौत हो गई. वहीं इस युवक ने बनाला के पास एनएच बंद होने पर ड्यूटी पर मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों पर उनकी कोई सुनवाई न करने और नशे में धुत होने के भी गंभीर आरोप लगाए हैं.
नरेश पंडित ने बताया कि ‘बुधवार शाम को अचानक उनकी मां की तबीयत बिगड़ गई. रात को बंजार से मां को कुल्लू अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की. 8 बजे के करीब औट में 18 पेड़े नाम की जगह के पास पहुंचे. हाईवे बंद होने के कारण एसडीएम और एसएचओ भी मौके पर थे. करीब डेढ़ घंटे फंसे होने के बाद हमने इन अधिकारियों से कुल्लू जाने का आग्रह किया, लेकिन उन्होंने मना कर दिया. बाद में बंजार विधायक सुरेंद्र शौरी को फोन किया तो हमें एक एस्कॉर्ट दी गई. इसके बाद हम अपनी मां को लेकर मंडी आए, लेकिन मंडी पहुंचने पर उनकी मौत हो गई. बुधवार रात प्रशासन के कर्मचारी नशे में धुत थे और कोई सुनवाई नहीं कर रहे थे. डेढ़ घंटे पहले मेरी माता अस्पताल पहुंचती तो जीवित होती.’नरेश ने बताया कि हम अस्पताल से शव लेकर बुधवार रात को दो बजे कैंची मोड़ पहुंचे और रातभर बारिश होती रही.
भारी बारिश के चलते काफी देर तक यहीं फंसे रहे. जगह-जगह सड़क बंद होने से शव को घर तक पहुंचाना भी मुश्किल हो गया. शव को ले जाने के लिए बार-बार गाड़ी बदलनी पड़ी.एसडीएम ने नकारे आरोपउधर, इन आरोपों को नकारते हुए एसडीएम बालीचौकी देवीराम ने बताया कि ‘मैं खुद तहसीलदार और थाना प्रभारी औट के साथ घटनास्थल पर मौजूद था. इसी बीच एक एंबुलेंस वहां पहुंची, जिसमें एक मरीज को अस्पताल ले जाया जा रहा था. मरीज के परिजन नरेश कुमार ने तत्काल मलबा हटाने की मांग की, लेकिन लगातार पत्थर गिरने के कारण उस समय मार्ग से मलबा साफ करना सुरक्षित नहीं था.
अधिकारियों ने मरीज को मंडी अस्पताल ले जाने की सलाह दी, जबकि परिजन कुल्लू ले जाने पर अड़े रहे. बाद में सहमति होने पर मरीज को मंडी अस्पताल भेजा गया और उन्हें एंबुलेंस के साथ पुलिस एस्कॉर्ट भी दी गई. थलौट थाना से एक हेड कांस्टेबल एंबुलेंस के साथ भेजे गए. ताकि मरीज सुरक्षित रूप से मंडी अस्पताल पहुंच सकें. पीड़ित परिवार की ओर से लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं.’

