हिमाचल की  बेटी दीक्षा की हिम्मत को दाद दीजिये, चंद सेकेंड से कुछ यूं दी मौत को मात

हिमाचल की बेटी दीक्षा की हिम्मत को दाद दीजिये, चंद सेकेंड से कुछ यूं दी मौत को मात

राइट न्यूज हिमाचल/मंडी

रात का वक्त था. भारी बारिश हो रही थी. इस दौरान फ्लैश फ्लड और लैंडस्लाइड का मलबा आया और काफी कुछ दब गया. 17 साल की बेटी दीक्षा भी मलबे में गले तक दब गई थी. उसने हिम्मत दिखाई और फिर आवाज लगाई. हालांकि, इस दौरा बेटी की मदद के लिए कोई सुन नहीं पाया और फिर वह जैसे तैसे मलबे से बाहर निकली. इस बीच परिजन भी बेटी की तरफ बढ़े और फिर मदद की. अब पूर्व सीएम जयराम ठाकुर ने उसके गांव में जाकर हालात का जायजा लिया और बेटी से भी मुलाकात की.

जानकारी के अनुसार, 30 जून की रात की यह घटना है. हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की सराज घाटी में आधी रात को कुदरत का कहर बरप रहा था. सराज के ही शरण गांव में भी आपदा का कहर टूटा. इस दौरान 17 साल की बेटी फ्लैश फ्लड के चलते सुरक्षित जगह में जा रही थी तो गले तक मलबे में दब गई. इस दौरान 17 वर्षीय दीक्षा ने साहस का परिचय दिया और हिम्मत दिखाते हुए मदद मांगी.

हालांकि, कोई बेटी की आवाज सुन नहीं पाया और फिर दीक्षा ने खुद कोशिश की और वहां से निकली. पिता ने बताया कि अगर एक सेकेंड की देरी होती तो बेटी भी सैलाब में बह जाती. वह कहते हैं कि शुरु में केवल मलबा ही आया था. बाद में बाढ में लकड़ी भी आई. दीक्षा और मौत के बीच एक सेकेंड का फासला था. पूर्व सीएम जयराम ठाकुर ने बेटी का हौंसला बढ़ाते हुए उसे शाबासी दी. दीक्षा ने कहा कि मलबे में वह गले तक दब गई थी. इस दौरान सुनने वाला कोई नहीं था.

फिर जैसे तैसे वह खुद मलबे से बाहर निकलीं.मंडी की सराज घाटी में इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदी आई है. यहां पर थुनाग, गोहर में सबसे अधिक नुकसान हुआ है. थुनाग बाजार तो मलबे में बदल गया है. मंडी में सर्च टीमों ने अब तक 13 शव बरामद कर लिए हैं और 29 लोगों की तलाश जारी है.

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