सिरमौर: नाबालिग बेटी की हत्या करने वाली मां को उम्रकैद , 1 लाख का जुर्माना भी

सिरमौर: नाबालिग बेटी की हत्या करने वाली मां को उम्रकैद , 1 लाख का जुर्माना भी

राइट न्यूज हिमाचल

जिला सिरमौर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नाहन गौरव महाजन की अदालत ने बेटी को बेरहमी के साथ मौत के घाट उतारने वाली आरोपी मां को दोषी करार दिया है। दोषी महिला ने अपनी 4 वर्ष की बेटी को लोहे की रॉड से पीटकर टॉयलेट सीट पर पटक कर बाथरूम में बंद कर दिया था, जिसके चलते उसकी मौत हो गई। अदालत ने वर्ष 2020 के इसी मामले में सोमवार को फैसला सुनाया।

अदालत ने दोषी अरुणा चौहान पत्नी वीरेंद्र कुमार निवासी गांव सरतेली, डाकघर कंडा बनाह तहसील कुपवी जिला शिमला, जो सुदर्शन कॉलोनी, वार्ड नम्बर 8, कुंजा मतरालियों तहसील पांवटा साहिब जिला सिरमौर में रहती है, को आईपीसी की धारा 302 के तहत कठोर आजीवन कारावास और 1 लाख रुपए जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है।जुर्माना अदा न करने की सूरत में दोषी को 1 साल के अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी।

इसके अलावा अदालत ने दोषी को आईपीसी की धारा 182 के तहत 6 माह के कठोर कारावास और 1000 रुपए जुर्माना अदा करने के आदेश भी दिए हैं। ये जुर्माना राशि अदा न करने की सूरत में दोषी महिला को 2 महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा काटनी होगी। अदालत में इस मामले की पैरवी उप जिला न्यायवादी (डिप्टी डीए) रश्मि शर्मा ने की।

डिप्टी डीए ने बताया कि यह मामला 2 नवम्बर 2020 को सामने आया था। रात करीब साढ़े 9 बजे आरोपी अरुणा चौहान ने अपनी बेटी (मृतक) को बाथरूम में लोहे की रॉड से पीटा और उसे टॉयलेट सीट सीट पर पटक दिया। इससे बेटी को काफी चोटें आई। इसके बाद आरोपी ने बेटी को बाथरूम में बंद कर दिया। अगले दिन यानी 3 नवम्बर को आरोपी अपनी बेटी को अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस पर पुलिस थाना पुरुवाला में आरोपी अरुणा चौहान के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 के तहत हत्या और धारा 182 के तहत केस दर्ज किया गया।

एसएचओ/इंस्पैक्टर विजय कुमार द्वारा इस मामले की जांच की गई। जांच के बाद पुलिस ने अदालत में चालान पेश किया गया। डिप्टी डीए ने बताया कि इस मामले में अदालत में अभियोजन पक्ष की तरफ से 26 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। अभियोजन पक्ष की तरफ से रिकॉर्ड पर लाए गए साक्ष्यों और तमाम दलीलों के आधार पर अदालत ने आरोपी अरुणा चौहान को दोषी ठहराया और कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

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