राईट न्यूज / शिमला
पांवटा साहिब स्थित बहुचर्चित टेक्नोमैक कंपनी के मालिक राकेश कुमार शर्मा ने चार हजार करोड़ से ज्यादा की कर चोरी और बैंक लोन फ्रॉड करने के बाद सिंगापुर, यूएई, इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका समेत आठ देशों में हजारों करोड़ रुपये का निवेश किया है। इस बात की जानकारी टेक्नोमैक घोटाले में मनी लाॅंड्रिंग के एंगल से जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की अब तक की जांच में सामने आई है। जांच में पता चला है कि कंपनी के मालिक और प्रबंधन ने फर्जी दस्तावेजों की मदद से पहले हिमाचल प्रदेश सरकार और विभिन्न बैंकों के साथ फर्जीवाड़ा किया। इसके बाद हासिल की गई रकम को दूसरे देशों में भेज दिया।
इसी राशि के भेजने की प्रक्रिया मनी लाॅंड्रिंग के दायरे में आ गई है। सूत्रों के अनुसार अब इन देशों को कुल कितनी राशि कितनी बार और कब भेजी गई, इसकी पूरी जानकारी हासिल करने के लिए प्रवर्तन निदेशालय ने संबंधित देशों की सरकारों को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉड्रिंग एक्ट 2002 के तहत लेटर ऑफ रिक्वेस्ट जारी कर दिए हैं। इन लेटर के जवाब में संबंधित देशों की सरकारों से जवाब आने पर यह साफ हो जाएगा कि किन देशों में शर्मा ने कितना काले धन का निवेश किया। कंपनी के प्रबंधन के खिलाफ ईडी और सीआईडी के अलावा अब सीबीआई और दिल्ली पुलिस भी बैंक लोन फ्रॉड से जुड़े अलग अलग मामलों की जांच में जुटी है।
अबु धाबी में इंटरपोल की गिरफ्त में है राकेश
फिलहाल कंपनी के प्रबंध निदेशक रहे आरके शर्मा को इंटरपोल ने अबु धाबी में गिरफ्तार कर रखा है। उसकी गिरफ्तारी हिमाचल प्रदेश की सीआईडी के उस केस के आधार पर की गई है जिसमें उस पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कर चोरी और बैंक लोन हासिल करने का आरोप है। इस मामले की जांच एसपी साइबर क्राइम संदीप धवल की अध्यक्षता वाली विशेष जांच टीम कर रही है। इसी एसआईटी ने शर्मा के खिलाफ नाहन की अदालत से गिरफ्तारी वारंट हासिल किया था और फिर उसके आधार पर इंटरपोल से संपर्क साधा था। फिलहाल उसे भारत लाने के लिए सीबीआई और विदेश मंत्रालय प्रयास कर रहे हैं।

