आपदा प्रभावितों के लिए मदद मांगने फिर दिल्ली पहुंचे CM सुक्खू

आपदा प्रभावितों के लिए मदद मांगने फिर दिल्ली पहुंचे CM सुक्खू

राइट न्यूज हिमाचल

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू आपदा प्रभावितों के लिए मदद मांगने के लिए एक बार फिर से दिल्ली पहुंच गए हैं। उन्होंने दिल्ली पहुंचने पर सायं केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की।

जानकारी के अनुसार इस दौरान मुख्यमंत्री ने आपदा प्रभावित व भूमिहीन हो चुके परिवारों के पुनर्वास के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि आपदा में भूमि गंवाने वाले परिवारों को दोबारा बसाने के लिए 1 से 5 बीघा तक तक वन भूमि उपलब्ध करवाने की अनुमति प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश का 68 फीसदी भू-भाग वन क्षेत्र के अंतर्गत आता है।इस कारण राज्य सरकार के पास वैकल्पिक भूमि की उपलब्धता सीमित है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आपदा पीड़ितों को शीघ्र सुरक्षित एवं स्थाई तौर पर पुनर्वास उपलब्ध करवाने के लिए प्रयासरत है।

ऐसे में केंद्रीय मदद मिलने से इस कार्य को शीघ्र किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री मौसम खराब होने के कारण सड़क मार्ग से दिल्ली के लिए रवाना हुए। उन्होंने इससे पहले सुबह लोगों की समस्याओं को सुना तथा अधिकारियों को इसका तुरंत निवारण करने संबंधी आदेश भी दिए।राहुल गांधी ने 4 को बुलाए हिमाचल कांग्रेस के नेता, सियासत गरमाईलोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 4 अगस्त को दिल्ली में हिमाचल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को सत्ता-संगठन से जुड़े विषयों पर चर्चा के लिए बुलाया है।

सूत्रों के अनुसार इस बैठक में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, हिमाचल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह, प्रदेश सरकार के मंत्री एवं पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष भी भाग लेंगे। इसमें प्रदेश कांग्रेस की नई टीम के गठन, खाली पड़े मंत्री के 1 पद को भरने एवं निगम-बोर्ड में नई ताजपोशियां करने जैसे विषय को लेकर चर्चा हो सकती है।मुख्यमंत्री इस दौरान अपनी सरकार के रिपोर्ट कार्ड को सामने रखने के अलावा प्रदेश में आई प्राकृतिक आपदा के विषय में भी कांग्रेस के केंद्रीय नेताओं को अवगत करवाएंगे।

इस बैठक के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद का नाम एवं नई कार्यकारिणी तय हो सकती है। अब देखना यह है कि कांग्रेस आलाकमान प्रतिभा सिंह को फिर से यह दायित्व सौंपता है या फिर किसी अनुसूचित जाति के नेता को कमान सौंपने की दिशा में आगे बढ़ता है।

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